Saturday, September 19, 2009

बीतें लम्हे...



ज़िन्दगी के कुछ ख्वाब अधूरे ही रह गए।


जो थे साथ वो सब चले गए।


जाना चाहता है ये दिल वापस।


पर दिल के अरमान इन अश्को के साथ बह गए॥



याद आती है उन पलो की।


जो अपनों के साथ गुज़ारा करते थे।


याद में बेजार हो रहा था ये दिल।


पर कम्बखत ये आंसू भी हमें दगा दे गए॥



दिल के इक कोने से आवाज़ उठी।


की लो अब कभी भी हम आंसू न बहायेंगे।


सहेज कर रखा है उन यादों को अपने दिल में।


उन यादों की खातिर हम सदा मुस्कुराएंगे॥