Saturday, August 28, 2010

मेरा गुनाह क्या है ये तो बता दीजिये।


मेरा गुनाह क्या है ये तो बता दीजिये।

आशिक हूँ मैं किसी का, इतनी तो मत सजा दीजिये॥


बहुत तद्पाया है उसने यादो में आकर।

कोई कहे उनसे अपना चेहरा तो दिखा दीजिये॥


सारी राह में कांटे ही कांटे हैं।

न कुछ हो तो कुछ फूल आप ही बिछा दीजिये॥


जागे हैं हम बहुत उठ उठ कर रातो में।

अब चैन की नींद आप ही हमको सुला दीजिये॥


बहुत पी ली है हमने मैखानो में जाकर।

एक बार ज़रा नज़रों से ही पिला दीजिये॥


गिन गिन कर गुजरे हैं दिन कितने।

इंतज़ार का कुछ तो सिला दीजिये॥