
प्यार का ये एहसास कुछ ख़ास है।
सब कुछ दूर है, सब कुछ पास है।
अब तक तनहा था , अब यादों में भी उसका साथ है।
पल में खुश था, पल में उदास है॥
अब महफिलों में जाना भाता नही है।
दोस्तों का साथ रास आता नही है।
घूमना फिरना अब गुनाह लगता है।
उसकी याद में दिल फना लगता है॥
उसकी सादगी अब गहना लगती है।
बाकी सब सहना अब मुश्किल लगता है।
रात की गहरायिओं बहना अच्छा लगता है।
उसकी याद में रहना अच्छा लगता है॥
जब वो पास नही होती है।
उससे बात करने को दिल मचल जाता है।
जब वो सामने आती है।
कम्बखत ये होंठ सिल जाते है॥
ये दिल अब जज्बाती लगता है।
बाकी सब बेबाती लगता है।
अकेलापन अपना साथी लगता है।
बाकी सब बर्बादी लगता है॥

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