Thursday, February 25, 2010

मन का मीत !!!


छायी फिर से बहार हो जैसे
हल्का हल्का खुमार हो जैसे

रात भर थे तुम ही ख्यालों मे
दिल को तुमसे ही प्यार हो जैसे

बात ऐसी वो कह गया सब से
बस मेरा ऐतबार हो जैसे

हर घडी पूछता है वो सबसे
रखता मेरा ख्याल हो जैसे

कितने खामोश है लब उसके
दिल मे कोई गुबार हो जैसे

रहती है बस नमी सी आँखों मे
अब भी कोई इन्तजार हो जैसे

मर के भी नाम था तेरा लब पे
जाँ ये तुझ पे निसार हो जैसे

Monday, February 8, 2010

मेरी रूह निकलने वाली होगी

मेरी रूह निकलने वाली होगी
मेरी सांस बिखरने वाली होगी
फ़िर दामन जिंदगी का छूटेगा
धागा सांस का भी टूटेगा
फ़िर वापस हम ना आयेंगे
फ़िर हमसे कोइ ना रूठेगा
फ़िर आंखों मे नूर ना होगा
फ़िर दिल गम से चूर ना होगा
उस पल तुम हमको थामोगे
हम सा दोस्त अपना फ़िर मांगोगे
फ़िर हम ना कुछ भी बोलेंगे
और आंखें भी ना खोलेंगे
उस पल तुम रो दोगे
और दोस्त अपना खो दोगे, दोस्त अपना खो दोगे