Monday, April 12, 2010

आइने में भी अब तो तस्वीर नही दिखती


आइने में भी अब तो तस्वीर नही दिखती
हर जगह बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है

कैसे जगह बनाऊँ तेरे दिल में अपने लिए
वहाँ तो पहले ही कड़ा पहरा नज़र आता है

आया था तेरे पास, प्यार का समंदर समझ कर
करीब से देखा, तेरा दिल भी सेहरा नज़र आता है

चाहे बता न पाऊँ तुझसे कितना प्यार करता हूँ मैं
अपना प्यार मुझे समंदर से भी गहरा नज़र आता है

नही छलकते हैं आंसू पलकों से बेशक लेकिन
गमों का सैलाब इनमें भी ठहरा नज़र आता है

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