
आज भी उसे मेरी याद तो आती होगी
कैसे वो अपने दिल को समझाती होगी
न उसे मेरा, न मुझे उसका इंतज़ार है
ये कैसी मोहब्बत है, कैसा ये प्यार है
नहीं करती ज़िक्र मेरा वो महफ़िल में लेकिन
तन्हाई में मेरी गज़लें ज़रूर गुनगुनाती होगी
आज भी उसे मेरी याद तो आती होगी
साथ नहीं है हम, लेकिन जुदा भी नहीं
हमारी मोहब्बत से वाकिफ तो खुदा भी नहीं
मेरे लिखे खत जब वो औरों से छुपाती होगी
आज भी उसे मेरी याद तो आती होगी
भूल पाना उसको कहाँ इतना आसान होता है
जब कोई किसी का दिल जिगर और जान होता है
अश्को की बारिश को कैसे वो रोक पाती होगी
आज भी उसे मेरी याद तो आती होगी

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