Monday, June 1, 2009

होठों पे हँसी देख ली, दिल के अन्दर नही देखा.....

होठों पे हँसी देख ली, दिल के अन्दर नही देखा.....
यारों ने मेरा ग़म का समंदर नही देखा.......

कितनी हसीं दुनिया ये देखा है आपने..........
मर मर के जीने वालों का मंज़र नही देखा..........

शीशे का मकान तुमने बना तो लिया ऐ दोस्त.......
लेकिन वक्त के हाथ का पत्थर नही देखा.........

रिश्तों के टूटने का दर्द आप क्या समझें......
वो लम्हा आपने कभी जी कर नही देखा........

भटके रौशनी की तलाश में न जाने कहा कहा........
अफ़सोस की अपनी रूह के अन्दर हमनें नही देखा.......

2 comments:

  1. start was nt that good bt end summed up all...
    achha ye emotions hote h ya bana k likhta hai .........

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  2. wat do u think?????????????

    waise shayad emotions hote hai jinhe banaa kar likh deta hu.......

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