हाँ मैं एक नशे में था , अनजानी राह की तनहा राह भी था.....
मिले एक हमसफ़र राह में, खोया यह दिल उसकी बाहों में....
राही थी वो भी उसी राह की....जिसकी कोई मंजिल नही.....
वोह जो बिछड़ गई.....मुझसे दूर गई..........
आज फिर दिल उदास है....ये मन बेचेन है...
फिर वोही तड़प वोही मायूसी महसूस हो रही है.....
कभी ले लिया शाम-ऐ-ग़म का सहारा....तो कभी रो दिया नाम लेकर उसका
कभी हमने उन राहों में सजदे बिछाए .... मगर वो न आए....
वोह उन राहों में घूमती है.....जिन राहों से हो कर आया हूँ
कितनी उम्मीदें ले कर गया था.....कितनी मायूसी लिए जा रहा हूँ...
चोट पे चोट दिल पे खाए हुए .... होंठ फिर भी मुस्कुराये हुए.....
मौत की वादियों पे बैठा हूँ.......ज़िन्दगी के दिए जलाये हुए........
Tuesday, June 9, 2009
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u made me cry again :)
ReplyDeletecry bol kar smiling smiley...........thts a rare combination..
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