Tuesday, August 11, 2009

जिंदगी की तलाश...



जो है अंदर वो बाहर क्यू नही आता ,


है तो दोस्त हज़ारो , पर क्यू में हमेशा अपने को अकेला पाता !



है ना कोई कमी , ना कोई मजबूरी ,


पर अब नही सही जाते मुझसे ये दूरी !



मुझे नही पता प्यार क्या होता है,


मुझे नही पाता इश्क़ क्या होता है ;


पर क्या करू ये दिल हमेशा तेरी याद में रोता हैं !



नही मालूम की तुझसे कभी मिल पाऊँगा ,


नही मालूम की तुझसे कभी कह पाऊँगा ,


बस इतना पता है की तुझे हमेशा खुश चाहूँगा !



एक अरसा हुआ तुझसे मुलाकात हुए ,


अब तो सिर्फ़ तेरी तस्वीर से बात करता हूँ ,


सोचता हूँ तू उसमे सुन लेगी ,


इसलिए दिन रात अब उससे ही इज़हार करता हूँ!

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