Wednesday, August 12, 2009

दीदार तो कर लू .....


बिखरा के जुल्फे फ़िर शाम कर दे


कुछ हसी पल आज मेरे नाम कर दे






मुद्दत से बहता है ये दरिया बनकर


अपने होठो से छूकर इसे जाम कर दे






अब तलक छुपा रखा है जो पलकों मे


उठाकर परदा जलवा- ऐ-आम कर दे






कैद कर मुझे अपने हुस्न की जंजीर से


मुझे भी आज तू अपना गुलाम कर दे

2 comments:

  1. abe kabhi khrab bhi likha kar har bar yahi likh likh k main pak jaunga "superb yaar superb"

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  2. thnx bhai..........
    koshish karunga ki agli baar kharaab likhu.... :)

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