Friday, May 15, 2009

तनहाइयों के पल........

बस यही हकीकत है

और सब फ़साना है

दिल का खून करने का

प्यार एक बहाना है,

ख्वाहिशो के जंगल में

हसरतों के दायरे है

अनगिनत मुसाफिर है

अनगिनत लुटेरे है,

आशिकों की भीड़ में

क़त्ल-ऐ-दिल का मेला है

आदमी अकेला था

आदमी अकेला है......

No comments:

Post a Comment