
बिखरा के जुल्फे फ़िर शाम कर दे
कुछ हसी पल आज मेरे नाम कर दे
मुद्दत से बहता है ये दरिया बनकर
अपने होठो से छूकर इसे जाम कर दे
अब तलक छुपा रखा है जो पलकों मे
उठाकर परदा जलवा- ऐ-आम कर दे
कैद कर मुझे अपने हुस्न की जंजीर से
मुझे भी आज तू अपना गुलाम कर दे
मैं तो बस सच्चाई बयाँ कर रहा हूँ... टूटे टुकडो की तामीर बयाँ कर रहा हूँ... ये हमारे रिश्तें का फ़साना ही है... इस फ़साने की अहमियत बयाँ कर रहा हूँ!!!
abe kabhi khrab bhi likha kar har bar yahi likh likh k main pak jaunga "superb yaar superb"
ReplyDeletethnx bhai..........
ReplyDeletekoshish karunga ki agli baar kharaab likhu.... :)