
महोब्बत है अजीब, आंखो में आँसू सजाये बैठे है ।
देवता नही है, फिर भी हम सपनो का मंदिर सजाये बैठे है । ।
किस्मत की बात है, दुनिया से खुद को छुपायें बैठे है ।
कैसे बया करे, उन पर हम अपना सब कुछ लुटाये बैठे है । ।
बेरहम है ये दुनिया, फिर भी आस जमाये बैठे है ।
वो दूर है तो क्या, उनसे दिल से दिल लगाये बैठे है । ।
वो लौट कर न आयेगे, फिर भी नज़रे बिछाये बैठे है ।
उनसे मिलने की ललक में, सब कुछ भुलाये बैठे है । ।
आंखो से आँसू इतने गिरे , की समन्दर बनाये बैठे है ।
वो बेरहम है पता है मुझको , फिर भी तेरे सजदे में सर को झुकाये बैठे है । ।

a touching poem!!!
ReplyDeletetruly!!
I thot it was a touchin poem but cud'nt figure out y it was so.....!!
ReplyDeleteSmhw it's echo is still dere in my heart....
Resounds time n again...reminds me f smthn..
Helps me regain Hope!!